Thursday, December 9, 2010

परावाणी:The Eternal Poetry: जब जब शासक,खल के समक्ष झुकता है --

परावाणी:The Eternal Poetry: जब जब शासक,खल के समक्ष झुकता है --: "ki Nahi agar Janta Khamosh rahengi aisa hota rehanega"

1 comment:

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें