Friday, September 10, 2010

पहचानिए भारत के विभिन्न नागरिकों को


परिदृश्य - 1
दो लोग लड़ रहे हैं और एक तीसरा आदमी आता है उन्हें लड़ते देखता है और अपनी राह चला जाता है.

मुंबई वाला है.
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परिदृश्य - २
दो लोग लड़ रहे हैं. बाहर से दो लोग और आते है वो अपने दोस्तों को फ़ोन करते है और ५० लोग इकट्ठे हो जाते है और सब लड़ने लगते हैं.

आप निश्चित रूप से पंजाब में हैं.
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परिदृश्य - ३
दो लोग लड़ रहे हैं और एक तीसरा आदमी आता है और शांति बनाने की कोशिश करता है तो वो दोनों लोग लड़ना छोड़ उसे मारते हैं.

आप दिल्ली पहुँच गए हैं.
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परिदृश्य - ४
दो लोग लड़ रहे हैं. उन्हें लड़ते देखने के लिए भीड़ इकट्ठी हो जाती है. एक आदमी आता है और वहा एक चाय की थडी खोल लेता है.

ये पक्का है कि आप अहमदाबाद में हैं.
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परिदृश्य - 5
दो लोग लड़ रहे हैं और एक तीसरा आदमी आता है. वह लड़ाई को रोकने के लिए एक सॉफ्टवेयर   कार्यक्रम लिखता है.
लेकिन कार्यक्रम में एक वायरस की वजह से लड़ाई बंद नहीं कर पाता  है.

ये बंगलूर है.
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परिदृश्य - ६
दो लोग लड़ रहे हैं. एक भीड़ इकट्ठा हो गई है लड़ाई देखने के लिए एक आदमी के साथ आता है और दृढ़ता से कहता  है कि "यह सब बकवास है ..  ये अम्मा" को पसंद नहीं है. समस्या अम्मा सुलझाएंगी.

जनाब आप चेन्नई पहुँच गए हें.
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परिदृश्य - ७
दो लोग लड़ रहे हैं और एक तीसरा आदमी चौथे के साथ आता है और एक रूस  और एक चीन फोन कर पता करता  है कि कौन सही है.

आप कोलकाता में हैं.
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परिदृश्य - ८
दो लोग लड़ रहे हैं. तीसरा  आदमी घर से आता है और कहता है कि मेरे घर के सामने नहीं लड़ सकते,  कहीं और जाओ लड़ने के लिए.

ये तय है कि ये केरल है.
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 परिदृश्य - ९
दो लोग लड़ रहे हैं. तीसरा आदमी बियर की बोतलें लेके आता है.  सभी एक साथ बैठकर बीयर पीते हें  और एक दूसरे को गाली देते रहते हें और सभी दोस्त के रूप में घर जाते हें.

यार मौज करो आप गोआ पहुच गए हें.
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डिस्क्लेमर  - इसे शुद्ध हास्य के रूप में लिया जाये. ब्लॉग लेखक भारत की अनेकता में एकता में यकीन रखता है.

22 comments:

विवेक सिंह said...

सरल हास्य !

अविनाश वाचस्पति said...

यकीनन यकीन करने लायक है।

shashisinghal said...

बहुत खूब शर्माजी भारत की अनेकता में एकता पर तो यकीन और भी ज्यादा हो चला है । कुछ भी हो आपके हास्य के माध्य्म से हमने अपने भारत की विशेषता को काफी नजदीक से जान लिया है ।

Goverdhanlal said...

Maje aagaye

शिवम् मिश्रा said...

क्या बात है .......बहुत खूब, दादा .....पूरा भारत भ्रमण करवा दिया आपने तो !

honesty project democracy said...

सार्थक सोच से निकली सार्थक व्यंग ...

shikha varshney said...

वाह ..बभूत खूब ..क्या विश्लेषण है ...हम तो गोवा ही जाकर बस जायेंगे फिर :)

महेन्द्र मिश्र said...

अरे भाई साहब न जाने कहाँ कहाँ पहुंचा दिया आपने .... रोचक है शर्मा जी ...

राजीव तनेजा said...

मजेदार :-)

राज भाटिय़ा said...

बाकी तो पता नही जी लेकिन पंजाब ओर दिल्ली के बारे सही लिखा आप ने, धन्यवाद:)

मो सम कौन ? said...

पंजाब और दिल्ली की तो हम भी गवाही देते हैं जी, यही देखे हैं अब तक।
बाकी भी जरूर ठीक होंगे।
मजेदार पोस्ट।

Shah Nawaz said...

मजेदार :-)

बीना शर्मा said...

क्या भाई,सरल हास्य और इतनी बड़ी बात भी कह गए आप |वाकई किसी भी व्यक्ति को उसके कार्यों से जान सकते हैं|अच्छा लगा |और जो इनसब घटनाओं का जीवंत चित्रण कर दे तो निशच ित मानियेगा वह राजस्थान से है|

अजय कुमार झा said...

वाह वाह हरि भाई , आपने तो पूरे भारत का खाका खींच दिया मगर हमरे प्रदेश .........बिहार...और जुर्म होता है जहां कम ..माने उत्तर प्रदेश को काहे छोड दिये ... :) :)

अनूप शुक्ल said...

एक और:
दो लोग लड़ रहे हैं! तीसरा आता है और उनकी लड़ाई का विवरण लिखकर पोस्ट करने लगता है समझ लीजिये आप ब्लॉग प्रदेश में हैं।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

तो एक और क्यों नहीं:
दो लोग लड़ रहे हैं! तीसरा आता है और उनकी लड़ाई पर टिप्पणी कर चलता बनता है...समझ लीजिये आप किस गुटबपज़ के देश से हैं।

शोभा said...

सही और मज़ेदार तथ्य खोजे हैं।

दीपक 'मशाल' said...

३-४ साल पहले अंग्रेजी में पढ़ा था.. आपके द्वारा उसका हिन्दी अनुवाद देखकर और भी खुशी हुई..

शरद कोकास said...

भाई हमारा मध्यप्रदेश क्यो रह गया ?

rashmi ravija said...

यह भी खूब रही...बहुत ही रोचक प्रस्तुति

HarmonicaLucknow said...

वाह, शुक्रिया इतना अच्छा प्रान्त परिचय बताने के लिए!! मजेदार : ))

दर्शन कौर 'दर्शी' said...

panjabi ko thik pahchana ....bahut khub ....