Wednesday, August 24, 2011

कुछ टूटे फूटे शब्द



मोहब्बत एक पूजा है अगर आँखों मे  पानी है
मोहब्बत दो दिलो के तीर पे गंगा का पानी है
सच्चे लोग पीते हैं मोहब्बत रस के प्याले को
झूठे प्रेमियों के लिए तो ये बोत्तल का पानी है
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रसीले होठ तेरे थे सुखद अहसास मेरे थे
सुनहरे केश तेरे थे लिपटते गाल मेरे थे
मगर जब स्वप्न टूटा तो यही सच सामने आया
न तू मेरी न मैं तेरा सुखद वो स्वपन मेरे थे
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भोर की पहली किरण कहती सुवह से,
मैं प्रथम उस सूर्य की अभिसारिका हूँ
तुम भले नित की करो जलपान उसके साथ पर
मैं प्रथम उस सूर्य की परिचारिका हूँ।

8 comments:

aman 'bas aman' said...

isse imandar chitran nahi ho sakta shayd ho sakta ho acha ho par imandar nahi

vnadan

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सुन्दर महाराज जी ....

Shekhar Kumawat said...

achi rachana he


bahut khub


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

महफूज़ अली said...

अरे! कहाँ टूटे-फूटे शब्द हैं.... हर शब्द तो अपने आप में ही मुकम्मल है....इतनी सुंदर और अच्छी रचना पढ़ाने के लिए आपका बहुत आभारी हूँ...

वन्दना अवस्थी दुबे said...

सुन्दर मुक्तक. बधाई.

Udan Tashtari said...

बेहतरीन मुक्तक हैं तीनों, वाह!

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

Shandar muktak
behatrin

दर्शन कौर' दर्शी ' said...

"मोहब्बत एक पूजा है अगर आँखों मे पानी है ?
मोहब्बत दो दिलो के तीर पे गंगा का पानी है ?
सच्चे लोग पीते हैं मोहब्बत के रस के प्याले को,
झूठे प्रेमियों के लिए तो ये सिर्फ बोत्तल का पानी है ?"

सच कहा आपने --- "आजकल सच्ची मुहब्बत होती कहा हैं जी ---सबके दिल पत्थर के और बोत्तल में रंगीन पानी होता हैं --जब ये पानी पेट में जाता हें तो मुहब्बत रंगीन नजर आती हें -और जब ये उतरता हें तो वही रंगीनियाँ विरानियाँ नजर आती हैं ...."

"मुहब्बत के लिए कुछ खास दिल मखसूस होते है !
यह वो नगमा हैं जो, हर साज़ पर गया नहीं जाता !!"