Wednesday, February 17, 2010

जोधपुर ब्लोगर मिलन - समापन किश्त






ये  ब्लोगरो  के  मेले  
दुनिया  में  कम  ना  होंगे 
अफ़सोस  हम  ना  होंगे 
पिछली  2 पोस्ट  पर  आप  सबके  मिले  प्यार  के  लिए  स्नेहाविभूत  मैं थोडा  डर  सा  गया  हूँ  कि  क्या  मैं   आगे  की  बात  उस स्तर पर  आप  तक  पहुचा   पाउँगा  जैसे  कि और  साथी  आसानी   से  पहुचा  देते  है  और  आप  सभी  मेरे  से  अपेक्षा  कर  रहे  हैं.  
जैसा  कि  मैंने  पहले  बताया  कि   इस  ब्लोगर  मिलन  का  कोई  निश्चित  एजेन्डा नहीं  था  और  प्रमुख  उद्देश्य  था  एक  दूसरे  को  और  ब्लॉग  की  दुनिया  के  विविध  आयामो को जानना  और  खुद  को  इस  विधा  के  लिए  अधिक  सहज  और  प्राभावशाली  बनाना  ही  था. 

तो  अब  आगे  बढ़ते  हैं. सूत्रधार  के  रूप  मे  सबसे  पहले  मैंने  सभी  को  एक  दूसरे  से  परिचित  कराया  और  थोड़ी  ही  देर  मे  हम  सभी  एक  दूसरे  के  साथ  एक  सहज  सम्बन्ध  महसूस  करने  लगे. फिर  मैंने  सभी  को  ब्लॉग  जगत  से  अपने  जुड़ने  की  प्रक्रिया  और  अपने   ब्लॉग  और  अपने  विचार  देने  के  लिए  आमंत्रित  किया. 

बात  शुरू  हुई  श्री  दिनेश  राय  द्विवेदी  जी  से  जो  कि  हमारे  मेहमान  भी  थे  और  हम  सब  मे  वय  और  अनुभव  में  सबसे  बरिष्ठ  भी. उन्होंने  बताया  कि  बेटे  ने   जब  एम सी मे  प्रवेश लिया  तो  उसकी  जरूरत  के  हिसाब  से  कंप्यूटर  लिया  गया  लेकिन  धीरे  धीरे  उसका  सबसे  ज्यादा  उपयोग  मै ही  करता  रहा. ऐसे  ही  जब  नेट  कनेक्शन  लिया  तब  भी  मैंने  ही  इसे  ज्यादा  काम मै लिया. फिर  दोनों  बच्चो  के  पास  अपने  लेपटॉप हो  गए  तो  कंप्यूटर  ऑफिस  मै  आ  गया. बहुत  दिन  तक  मै  औरो  के  ब्लॉग  पढता  रहा. मेरा  ब्लॉग  से  जुड़ने  का  मन  था  लेकिन  मै  कोई  भी  काम  करता  हूँ  तो  खूब  सोचकर  और  फिर  पूरी   तयारी  के  साथ  करता  हूँ . मैंने  तीसरा  खम्बा  के  माध्यम  से  न्याय  व्यबस्था  की  कमियों  से  होने  बाली  परेशानियों  पर  लिखा. भारत  मै  न्याय  व्यबस्था  के इतिहास  पर  भी  मैंने  नियमित पोस्ट  लिखी. इसके  साथ  ही  मैं  ब्लॉग  के  जरिये  देश  के  हर  कोने  से  आने  बाली  सलाह  की  प्रार्थना  को  भी  पोस्ट   के  रूप  में  अपने  ब्लॉग  पर  जगह  देता  रहा  हू. इसके  अलावा  मेरा  अनवरत  ब्लॉग  भी  समसामयिक  मुद्दों  और  सरोकारों, कविता  और  अन्य   साहित्यिक  रुचियों  के  लिए  लगातार  पढ़ा  जाता  है. वकील  साहब  ने  बताया  कि  सबसे  पहले  उन्होंने  एक  अखवार  मे  काम  किया  और  फिर उन्हें  मुंबई  के  एक  अखवार  मे  काम  करने  का  निमंत्रण  था  लेकिन  मुंबई  उन्हें रास  नहीं  आई  सो  वापिस  लौट  आये. 

१९७८  मै  वकालत  शुरू  की  उसमे  भी  शुरू  से  शोषित  और  मजदूर  के  हक़  के  लिए  लड़ना  ही  मुख्या  ध्येय  रहा. वकील  साहब  ने  ये  भी  कहा  की  उनका  माना  है  की  अभी  ब्लोग जगत  शैशव  अवस्था  मै  है  लेकिन  आगे  जो  अच्छा  लिखेगा  उसे  ही  यद्  किया  जाएगा  और  उन्हें  भी  लोग  पढ़ते  है  तो  अच्छा  लगता  है  और  जहा  लिखा  हुआ  उनको  अच्छा  लगता  है  वहा  वो  प्रोत्साहन  भी  देते  है  और टिप्पणी  मै  अपनी  राय  भी  देते  हैं. कुछ  ख़ास  ब्लोगर्स  की  चर्चा  चलने  पर  वकील  साहब  ने  कहा  की  वो  यथा  संभव  सभी  के  ब्लॉग  पढ़ते  हैं  कुछ  से  नेट  पर  और  फ़ोन  पर  चर्चा  भी  होती  है  एक  चर्चित  ब्लोग्गर ( जो  ब्लॉग  पर  नारीवाद  की  अति  और  पुरुष  विरोधी  मानसिकता  के  लिए  जानी  जाती  है ) का  जिक्र  आया  तो  आपने  कहा  की  उनसे  नारी  मुद्दों  पर  खूब  चर्चा  होती  थी  और  वो  उनके  विचार  भी  मांगती  थी  लेकिन  एक  दिन  उस  ब्लोग्गर  की   किसी  पोस्ट  से  उन्होंने  पूरी  असहमति  दर्ज  की  तो  उन्होंने  कहा  अब  मै  कभी  आपसे  बात  नहीं  करूंगी  तो  उन्होंने  भी  खुशी  से  हमेशा  के  लिए  विदा  दे  दी. अजीत  वडनेकर  के  ब्लॉग  पर  उनके  संस्मरण  भी  छपे  है  जिन्हें  सभी  ने  बहुत  पसंद  किया  था .

इसके  बाद   चर्चा  को  संजय व्यास  ने  आगे  बढ़ाया  और  उन्होंने  अपने  बारे  मे   बताया  की  वो  बाड़मेर  से  है  तो  बात   चली  बाड़मेर  और  जोधपुर  के  जीवन  की  और  वहा  युवाओ  के  लिए  अब्सरो  के  अभाव  की. वहा  के   ग्रामीण  परिवेश  की  जोधपुर  के  जीवन  से  तुलना  और  अब  जब  वहा  तेल  के  भण्डार  मिले  है  और  रिफाइनरी  खुलने  ही  बाली  है  तब  बदले  माहौल  मे  रोज़गार  और  जीवन  मे  संभावित  बदलाव  पर  खुलकर  चर्चा  हुई. संजय  ने  ये  भी  बताया  की  वो  अपने  ब्लॉग  पर  केवल  गंभीर  लेखन  करते  है  और  टिप्पणी  लेने  देने  से  बहुत  प्रभावित  नहीं  होते.

चर्चा  की  कड़ी  से  जुड़ते  हुए  सीप  का  सपना  ब्लॉग  के  श्री  राकेश  मूथा जी  ने  अपने  लेखन  के  सरोकारों, कविता   और  नाटको  से  अपने  लगाव  और  सक्रियता  का  जिक्र  किया. सीप  का  सपना  नाम  से  उनकी  कविताओ की  पुस्तक  भी  प्रकाशित  हुई  थी  और  अब  सीप  का  सपना  ब्लॉग  में  लगभग  नियमित  रूप  से  वे  अपनी  नयी  कविताएं  डालते  रहते  हैं. उनके  कुछ  नियमित  पाठक  हैं उनकी  टिप्पणिया  भी  मिलती  हैं. 

इसके  बाद  चर्चा  का  सूत्र  एक  मात्र  महिला  ब्लोगर  कुमारी  शोभना  चौधरी  को  मिला. उनको  लेकर  कौतूहल  सभी  को  २  कारणों  से  था एक  तो  इन  दिनों  वो  रिसर्च मे  पूरी  तरह  डूबी  हुई   हैं और  इस   रिसर्च के  काम  की  एकरूपता को   तोड़ने  और  उस  मूड से  बाहर  आने  के  लिए  वे  सर्फिंग करती  हैं  और  इसी  लिए  अपने  ब्लॉग  पर  जो  मन  को  भाता   है  वो  लिखती  हैं. अपने  परिचय  मे  वेहद  प्रतिभाशाली  और  बहुमुखी  प्रतिभा  की  धनी  शोभना  ने  १०वी  कक्षा  मे  राजस्थान  बोर्ड  की  अपनी  मेरिट और  आगे  की  शैक्षणिक  उपलब्धियों  के  अलावा  शिक्षेतर गतिबिधियों से  जुड़े  होने  और  गणतंत्र  दिवस  परदे  मे  हिस्सा  लेने  और  अन्य  उपलब्धियों  का  जिक्र  किया. शोभना से सभी  ये  भी  जानना  चाहते  थे  कि  ऐसी  क्या  बात  हुई  कि   उन्होंने  ब्लॉग  जगत  को  छोड़ने  का  निर्णय  लिया  वो भी  तव  जबकि  उन्होंने  उसी  दिन  इस  ब्लोगर  मिलन  में   भाग  लेने  की  पुष्टि  कर  दी  थी.

इस  मामले  में  शोभना  जी  का  कहना  था  कि  वो  ब्लॉग  जगत  में  इस  आशा  के  साथ  आयी  थी  कि  यहाँ  आम  जीवन  से  अलग  थोड़े  लेकिन  पढ़े  लिखे  और  परिष्कृत  रूचि  के  लोग  होंगे  और  पढने  लिखने  बाले  लोगो  के  बीच  जाकर  उन्हें  सुकून  मिलेगा.   लेकिन  पिछले  बहुत  दिन  से  वो  जिस  तरह  के  आरोप  प्रत्यारोप  ब्लॉग  जगत  में  देख  पढ़  रही  है  उससे  उनका  मन  खराब हो  गया . उनको  सबसे  ज्यादा  दुःख  इस  बात  का  होता   है  कि  बहुत  से  लोग  साधारण  पोस्ट  को  असाधारण  बताकर  कमेन्ट  करते  है. वे  खुद  बहुत  कम  कमेन्ट  करती  है  क्युकी  इतना  समय  उनके  पास  नहीं  होता  तो  ऐसे  मे  कुछ  लोगो  ने  उनको  अशोभनीय  कमेन्ट  भेजे  जिनका  निहितार्थ  ये  था  कि  वो  लडकी  है  इसलिए  इतने  कमेन्ट  आते  हैं. इस  बात  पर  सभी  ने  चर्चा  की. मेरा  खुद का  मानना  है  कि  ब्लॉग  जगत  भी  बाकी  दुनिया  का  ही  प्रतिबिम्ब  ही  है  और  महिला  होने  के  कुछ  फायदे  होते  है  तो  कुछ  नुक्सान  भी  लेकिन  इसके  लिए  ब्लोगर  महिला  को  तब  तक  दोषी   नहीं  ठहरा  सकते  जब  तक  वो  अपनी  तरफ  से  ऐसे  कमेन्ट  करने  बालो  को  ना उकसाती  हो. सभी  साथी  ब्लोगर्स    ने  शोभना  जी  से  अनुरोध  किया  कि  वो  अपना  लेखन  ऐसे  ही  जारी  रखे  और  इस तरह  के  लोगो  से  घबराये  नहीं.

मेरे  अलावा  जो  बचे  हुए  वक्ता  रहे  वो  थे  कुश जो कि शायद  सबसे  उर्जावान  युवा  ब्लोगर  हैं  और  पूरे  ब्लॉग  जगत  मैं  उनकी  बहुआयामी  प्रतिभा  का  लोहा  माना  जता  है . वो  जयपुर  में  एक  सॉफ्टवेर  डेवेलोपमेंट  कंपनी  मैं  कार्यरत  हैं  और  ब्लॉग  जगत  में  तकनीक, लेखन  प्रतिभा  और  सक्रियता  के  लिए  जाने  जाते  हैं  वो  यदा-कदा  चिटठा  चर्चा  भी  करते  है  और  उनकी  चिटठा  चर्चा  को  बहुत  पसंद  किया  जता  है. उन्होंने  ब्लॉग  जगत  के  अपने  अनुभव  भी  बताये  और  सक्रिय  ब्लोग्गरों  के  ब्लॉग  और  उनके  लेखन  पर  भी  चर्चा  की.  साथ  ही  ब्लॉग  जगत  में  होने  बाले  विवादों जैसे  बबली  जी  के  ब्लॉग  पर  हुई  गरमागरम   चर्चा  पर  भी  उन्होंने  अपनी  राय  जाहिर  की. मेरे  द्वारा  एक  ख़ास  ब्लोग्गर  को  घोर  पुरुष विरोधी  और  उनके  रवैये  को  अड़ियल  बताया  गया  तो  उनका  कहना  था  कि  उस ब्लोगर  का जो  स्टैंड  है  वो  उस  पर  पूरी  ताकत  से  काम  कर  रही  हैं.. 

इस  सारी  आपसी  चर्चा  में  जिन  ब्लोग्गर बंधुओं को  याद  किया  उनमे अविनाश  जी , अनूप  शुक्ल  जी ,  समीर  लाल  जी,   अरविन्द  मिश्रा  जी, ललित  शर्मा  जी, पावला  जी, अनीता  कुमार  जी (अनीता  जी  के  ब्लॉग  को  पढके  ही मुझे  ब्लॉग  जगत  के  बारे  मे  पता  लगा), रश्मि  रविजा  जी, अदा  जी, शिखा  वर्श्नेय  जी, भाई  मिथिलेश, भाई  महफूज, भाई  अजय  झा  जी  के  ब्लॉग  और  उनके  योगदान  पर  तो  चर्चा  हुई  ही  साथ  ही  नाइस   टिप्पणी  से  सबको  उपकृत  करने  बाले  ब्लोगर सुरेश जी  की   भी  चर्चा  हुई.

डिस्क्लेमर  

1. ये  चर्चा  तब  तक  अधूरी  ही  कही  जायेगी  जब  तक  कि  अगली  बार   मिलने  की  तमन्ना  बाकी  रहेगी. 
2. पुनः  इस  मिलन  और  चर्चा  का  उद्देश्य  ये  है  कि  अधिक  से  अधिक ब्लोग्गर  हमसे  जुड़  सकें.. .
3. राजस्थान  के  अन्य  शहरो  के  ब्लोग्गर  भी  कृपया  ब्लॉग  जगत  में  अपनी  उपस्तिथी  की  सूचना  से  अवगत  कराये.
4. मुझे  उम्मीद  थी  कि  वकील  साहब, कुश, संजय, राकेश जी और शोभना  की  तरफ  से  ये  विवरण  मेरे  से  पहले  आ   जाएगा  इसी  लिए  इस  विवरण  के  लिए  तीसरी  कड़ी   तक  इंतज़ार  कराया. इस  देरी  के  लिए  सिर्फ  मै  दोषी  हूँ.  
5. मुझे  सजा  सुनाने  के  लिए  इस  पोस्ट  पर  टिप्पणी  करना  अनिवार्य  नहीं  है  पर  करे  तो  डिलीट  नहीं  की  जायेगी.
वकील साहब फिर आना


    

Monday, February 15, 2010

जोधपुर ब्लोगर मिलन मे जानिये कि कौन आये - द्वितीय किश्त - १४.०२.२०१०










इस पोस्ट मे मेरी कोशिश है कि मै इस ब्लोगर मिलन मे शामिल हुए ब्लोगर साथियो से आपको परिचित करवा दू. मेरे अधिकतर मित्रो का आग्रह रहा कि मै जल्दी से जल्दी इस ब्लोगर मिलन के समाचार आप तक पहुचा दू. सबसे पहले तो मै यहा स्पष्ट कर दू कि इस मिलन का कोई एजेन्डा नही था. यह सिर्फ़ एक कोशिश थी बिल्कुल अलग थलग पडे जोधपुर के ब्लोगरो से सम्वाद करने की. आदरणीय वकील साहब इसके प्रेरणा पुरुष बने और मै साधन. बाकी का काम अन्य ४ साथियो ने पूरा किया. इसी बीच एक बहुत ही परेशान करने बाली खबर मिली कि शोभना जी जिन्होने बहुत सार्थक सम्वाद करके सन्जय व्यास तक हमे पहुचाया, उन्होने ब्लोगिन्ग को छोडने का मन बना लिया और ऐसी पोस्ट व्लोग वाणी पर दिखी. सहसा मुझे विश्वास नही हुआ. मैने तुरन्त उन्हे एस एम एस किया कि अचानक क्या बात् हुई ? खैर शाम को उनसे जी टाक पर बात हुई और उन्होने सुनिश्चित किया कि वो जरूर आयेन्गी.

वकील साहब से लगातर बात होती रही और सवेरे भी उन्होने पहुचते ही मुझे फोन किया. उन्हे वार कौन्सिल मे १२ बजे तक काम था सो मै ठीक  १२ बजे उन्हे लेने पहुच गया. आशा के विपरीत वकील साहब को थोडा अतिरिक्त समय लगा १२.४५ पर हम लोग घर के लिये चले और बात करते करते  करते हुए ही घर पहुचे और साथ मे दोपहर का भोजन किया. चून्कि हमारे पूर्वानुमान से ४५ मिनट अधिक हमे वार कौन्सिल मे लग गये तो १.३० के ब्लोगर मिलन के कार्यक्रम मे ठीक समय से पहुचना हमारे लिये सम्भव  नही था तो मैने सन्जय व्यास जी  से बात की कि हम १० मिनट देरी से पहुचेन्गे इसलिये वो शोभना जी को रिसीव कर ले. इसी बीच राकेश मूथा जी का फोन आय कि वो रास्ते मे खदे है इसलिये घर तक नही आये तो उन्हे रास्ते से साथ बिठाया और १.३५ पर हम अशोका गार्डन, पाल रोड, जोधपुर पहुच गये. वहा सन्जय व्यास जी और शोभना जी मिल गये. अब मैने कुश को फोन किया तो उन्होने कहा वो भी १० मिनट मे पहुच रहे है और सच मे कुश ५-१० मिनट के बीच हमारे साथ मिल गये. पिचली पोस्ट मे मैने २ फोटो डाली थी जिनमे इस मिलन कार्यक्रम के परिवेश की झलक दिखती थी. इस पोस्ट मे मै सभी ६ ब्लोगर साथियो का थोडा थोडा परिचय करा देता हू. आप  इन्हे इनकी   ही दी गुइ जानकारी से जानिये.            
नाम   :                  दिनेशराय द्विवेदी
उम्र    :                  ५४
लिन्ग :                  पुरुष
उद्योग  :                 वकील, कानूनी सलाहकार
स्थान  :                 कोटा, राजस्थान, भारत.

मेरे बारे मे

Lawyer since 1978. Interest in writing, litrary-cultural-social activities. 1978 से वकील। साहित्य, कानून, समाज, पठन,सामाजिक संगठन लेखन,साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि।
http://anvarat.blogspot.com/                   अनवरत        - क्या बतलाएँ दुनिया वालो! क्या-क्या देखा है हमने
http://teesarakhamba.blogspot.com/  तीसरा खम्बा - भारतीय कानून और न्याय प्रणाली पर चर्चा का मन्च
नाम                       राकेश मूथा
उम्र :                       ५१  
लिन्ग:                    पुरुष
खगोलीय राशि:        मिथुन
उद्योग:                    सरकार
व्यवसाय:               अभियन्ता
स्थान:                    जोधपुर, राजस्थान, भारत.


मेरे बारे में

this world is under imagnery joy....which is in end will change in bliss....if yur joy is well controlled by yurself and directed without any hope of returns.........rakesh
http://seepkasapna-rakesh.blogspot.com/ - सीप का सपना


नाम                       सन्जय व्यास
उम्र :                      ३९ 
लिन्ग:                   पुरुष
खगोलीय राशि:        व्रिश्चिक
उद्योग:                    सन्चार या मीडिया
स्थान:                    जोधपुर, राजस्थान, भारत.

मेरे बारे में

इस समय एक मीडिया संगठन में कार्यरत हूँ. पढने का शौक,जो लगातार कम भी हो रहा है,साथ ही लिखने की कोशिश करने का शौक भी थोड़ा है.आइन्स्टीन के फॉर्मूले को समझने से ज्यादा रूचि इस बात में कि उनके पुरखे किस तालाब में मछली पकडा करते थे. यानी उन चीज़ों के प्रति ज्यादा जिज्ञासा जो समय के कारण ज़र्द होती जा रही है.
http://sanjayvyasjod.blogspot.com/  संजय व्यास  -  तकनीक के इस भोजपत्र पर कुछ लिखने का प्रयास













नाम                        कुश
लिन्ग:                    पुरुष 
राशि:                      मिथुन
उद्योग:                     इन्टरनेट
स्थान:                     जोधपुर, राजस्थान, भारत. 
मेरे बारे में
खुद को ढूँढने की कोशिश में कितने ही थानों पर अपनी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा चुका हूँ.. भूली हुई याददाश्त साथ लेकर जितना जिया जा सकता है उस से थोडा सा ज्यादा जी रहा हूँ.. ईश्वर की बनायीं दुनिया से अभी तक विश्वास उठा नहीं है.. इसलिए अभी तक यही पड़ा हूँ.. बर्दाश्त की हद से थोडा ज्यादा बर्दाश्त कर लेता हूँ.. गुलज़ार को समझने की कोशिश जारी है.. अनुराग जैसा सिनेमा बना लु तो कुछ सुकून मिले.. दोस्तों की फेहरिस्त लम्बी है.. पसंदीदा फिल्मो की फेहरिस्त लम्बी है, क्या कहूँ साला यहाँ ख्वाहिशो की फेहरिस्त लम्बी है.. यहाँ वहां जब कही कुछ बात नहीं बनी तो ब्लॉग बना लिया..देखते है इस से अब कब तक बनती है..
http://kushkikalam.blogspot.com/ - कुश की कलम 











नाम                       शोभना चौधरी 

उम्र :                             २४ 

लिन्ग:                    स्त्री
खगोलीय राशि:        बैल
उद्योग:                    विज्ञान 

व्यवसाय:                अनुसन्धान
स्थान:                          जोधपुर, राजस्थान, भारत.

मेरे बारे में

काफी आगे जाने की तमन्ना है कुछ से मिलना फिर बिछुड़ना ये जिंदगी का ही एक पन्ना है इन पन्नों में दर्ज कुछ यादें है जिनको भुला न दे हम किए ख़ुद से ही कुछ वादे है जल्द ही हम अपनी मंजिल पर पहुँच जायेगे और वहां से सभी को अपने करीब पायेगे................................................. I am pursuing Ph.D. in Physics from Jai Narain Vyas University, Jodhpur, Rajasthan. My Achievements: *Awarded with Indira Gandhi National Service Scheme Award−2006 by the Vice President of India. *Participated in the All India NSS Republic Day Parade at Rajpath, New Delhi on Jan. 26, 2004. I am sure that this is starting........I hv a dream that everyone remember me after my death for my works........want to gain name and fame..........always want to laugh and enjoy the life in any condition.........I am strong enough to face any condition.........so I hope in future I shall rock the world.....................
http://shobhnathemystery.blogspot.com/ - एहसास, विचारो और वेदनाओ की टोकरी

नाम                       हरि प्रसाद शर्मा
उम्र :                             ४४ 
लिन्ग:                    पुरुष
खगोलीय राशि:         मीन
उद्योग:                     बैक अधिकारी
व्यवसाय:                प्रबन्धक
स्थान:                     जोधपुर, राजस्थान, भारत. 

http://hariprasadsharma.blogspot.com/ - नगरी नगरी द्वारे द्वारे    

    Sunday, February 14, 2010

    जोधपुर मे हुआ ब्लोगर मिलन - पहली किश्त - १४.०२.१०

    एक तरफ़ जहा ब्लोग जगत मे दिन भर वेलेन्टाइन डे पर तरह तरह की पोस्ट आ रही है वही जोधपुर मे कोटा से पधारे मशहूर ब्लोगर श्री दिनेश राय द्विवेदी जी (वकील साहब)  से मिलने के लिये एक छोटा सा ब्लोगर मिलन बिल्कुल अनौपचारिक रूप से हुआ. 

    इस ब्लोगर मिलन की प्रस्तावना लिखी गयी वकील साहब के पिछले दौरे से जब मैने पहल की और वकील साहन मेरे से मेरे कार्यालय मे मिलने आये. उस समय भी मिलना तो तय हो गया लेकिन एक दिन पहले ही मेरी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी और थोडी सी मुझे भी चोट आयी लेकिन जब वकील साहव का फोन आया तो वो अपना काम निबटाकर मेरे कार्यालय पधारे और करीब १ घन्टा हम लोग साथ रहे और ब्लोग जगत मे हो रही हलचल पर चर्चा हुई. तभी हमने ये तय किया कि अगली बार जब वकील साहब जोधपुर आये तो कुछ और साथियो के साथ मिला जाये. 

    इसी कडी मे मैने ये सूचना जारी कर दी कि १४ फ़रबरी २०१० को जोधपुर मे ब्लोगर मिलन होगा. मुझे बहुत कम ब्लोगर साथियो की जानकारी थी. मेरे अलावा सीप का सपना ब्लोग बाले श्री राकेश मूथा जी और है इसके अलावा बहुत मेहनत करने के बाद मुझे कुमारी शोभना चौधरी और उनके द्वारा श्री सन्जय व्यास जी का पता लगा. इन्ह्ए मैने सन्देश दिये और सौभाग्य से १-२ दिन मे ही इनसे सम्पर्क हो गया. और शनिवार को अनायास कुश से बात हुई तो ये पता चला कि जैसे मेरा घर जयपुर मे है और जोधपुर रह रहा हू वैसे ही वो जयपुर रह रहे है और घर जोधपुर  मे है. बात चली तो पता चला कि वो भी जोधपुर आ रहे है तो फिर दिन मे कार्यक्रम तय हुआ और १४.०२.२०१० रविवार को पाल रोड स्थित अशोक गार्डन मे दोपहर पश्चात मिलने का निश्चय किया.
    अभी विवरण जारी है,,,,,,,,,,,,,,,,,,    

       
     

     चित्र मे सभी ६ ब्लोगर है और नाम उनके नाम -.हरि शर्मा, कुश, दिनेश राय द्विवेदी, राकेश मूथा, शोभना और सन्जय व्यासनीचे का चित्र कुमारी शोभना द्वारा लिया गया 

    Thursday, February 11, 2010

    फिलाडेल्फिया (अमेरिकी राज्य पेंसिल्वेनिया ) मे वर्फ़ का नज़ारा




    श्री सन्जीव सोफ़्टवेयर  इन्जीनियर  -  फिलाडेल्फिया (अमेरिकी राज्य  पेंसिल्वेनिया )
    फिलाडेल्फिया नाम का शहर है 
    वहा रहते है बहुत पुराने दोस्त 
    कहने को अभासी पर लौकिक ही है 
    कई साल से बसे हुए है वहा 
    सन्जीव अपने परिवार के साथ 
    आज जब उनसे हुई बात 
    पूछा हमने कैसे है हालचाल 
    हटा रहा हू वर्फ़ के पहाड 
    जमी है २ -२ फ़ीट वर्ग 
    गाल बेहाल है यहा हमारा 
    आप पूछते हो क्या हाल है   

    वर्फ़  की जब बात सुनी तो 
    जिग्यासा मन मे उठी 
     कैसी दिखती होही  वर्फ़
    कैसा वातावरन होगा
    क्या मनोरम छटा होगी 
    तनिक हमको दिखा तो दो  


    कहने लगे शर्मा जी 
    जिधर भी नजर डालो 
    वर्फ़ की ही माया है 
    वर्फ़ का ही साया है 
    वर्फ़ मे कोई सडक पे 
    निकल नही पाया है 
    हमने तब उनसे पूछा
    क्या वहा हमेशा ही 
    ऐसा  ही मौसम है 
    ऐसे ही वर्फ़ का 
    चारो दिशाओ मे 
    खुला खेल होता है  


    इस पर वो कहते है 
    आखिरी के महीनो मे 
    हर साल  ऐसे ही 
    देखने मे आया है 
    यहा का मौसम तो 
    वर्फ़ीला ही होता है 

    लेकिन इस बार तो 
    १६० साल के बाद 
    इतनी वर्फ़ पडी है 
    सूरज के दर्शन नही 
    मौसम तो अच्छा है 
    पर परेशानी बडी 
    (चित्र गूगल से साभार  ) 

    Tuesday, February 9, 2010

    आज कुमार विश्वास जयन्ती है - जन्म १०.०२.१९७०

    वास

    डाँ कुमार विश्वास
    जन्मदिन  - बसंत पंचमी

    कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है
    मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
    मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है 
    ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है

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    १० फरवरी (बसंत-पंचमी ) को पिलखुवा (गाज़ियाबाद) में जन्में डाँ कुमार विश्वास का नाम हिन्दी कविता-प्रेमियों के लिए परिचय का मोहताज नहीं है। कवि-सम्मेलन के मंचों पर उनकी लोकप्रियता का कारण उनकी वाक्-पटुता, विद्वता, और समय-अवसर पर अपनी विराट स्मरण-शक्ति का प्रयोग है। श्रोताओं को अपने जादुई सम्मोहन में लेने का उनका अदभुत कौशल, उन्हें समकालीन हिन्दी कवि-सम्मेलनों का सबसे दुलारा कवि बनाता है। आई.आई.टी , आई.आई.एम या कॉरपरेट-जगत के अधिक सचेत श्रोता हों, या कोटा-मेले के बेतरतीब फैले दो लाख के जन समूह का विस्तार हो , प्रत्येक मंच को अपने संचालन में डॉ कुमार विश्वास इस तरह लयबद्ध कर देते हैं कि पूरा समारोह अपनी संपूर्णता को जीने लगता है। स्व० धर्मवीर भारती ने उन्हें हिन्दी की युवतम पीढ़ी का सर्वाधिक संभावनाशील गीतकार कहा था। महाकवि नीरज जी उनके संचालन को निशा नियामक कहते हैं। तो प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा के अनुसार वे इस पीढ़ी के एकमात्र ISO 2006 कवि हैं। हास्यरसावतार लालू यादव, अभिनेता राजबब्बर, गोविन्दा, खिलाड़ी राहुल द्रविड़, मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, नीतिश कुमार, टेली न्यूज के  चेहरो, उद्योगपतियों से लेकर भोपाल स्टेशन के कुलियों और मंदसौर मध्यप्रदेश की अनाज मंडी के पल्लेदारों तक फैला उनका प्रशंसक परिवार ही डॉ कुमार विश्वास की सचेत प्रज्ञा का परिचायक है। यह समूह डॉ कुमार विश्वास के देश दुनियां में फैले उन लाखों दीवानों का है जिन्हें उन्होंने बार-बार अपनी क्षमताओं से सम्मोहित किया है और जिनके दिलों की दास्तां को अपनी मीठी-आवाज , खास-अदायगी और खूबसूरत-लफ़्जों में बयान किया है।
    http://www.kumarvishwas.com/  से साभार 
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    आज १० फरबरी है और इसे मैं कुमार विश्वास जयन्ती के रूप में याद करता हूँ. डा. कुमार विश्वास जिन्हें मैं इसलिए बहुत पसंद करता हू कि उन्होंने हिन्दी कवि सम्मलेन के मंचो से विदा होते हुए गीतों को नया जीवन दिया. एक समय आ गया था कि गीतकारो को कोई सुनना ही नहीं चाहता था और बड़े नामी गीतकारो को भी केवल नाम के लिए ही बुलाया जाता था. उस समय डा कुमार एक नयी हवा के झोंके की तरह आये तो आते ही छा गए.

    १९९६ में कुमार का पहला कविता संग्रह प्रकाशित हुआ जिसके एक हस्ताक्षरित प्रति मेरे पास अभी भी है. उससे कुछ माह पहले ही उनसे ठीक से परिचय हुआ था. मेरी कुछ खराब आदतों में से ये भी है कि मैं पंक्ति, मुक्तक या गीत नहीं याद करता बल्कि किताब याद कर  लेता हू और १ महीने में ही मुझे डा. कुमार पूरी तरह से याद हो गए. कवि सम्मेलनों में कुमार से मुलाक़ात होती रहती.

    २००० की गीत चांदनी में कुमार जयपुर  आये तो गीत को समर्पित इस अनोखे आयोजन में आगे से पीछे तक कुमार की धूम मची  हुई थी. पहले दौर में ही कुमार ने सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया. दूसरे दौर में जब कुमार से एक के बाद दूसरे गीत की मांग होने लगी तो कुमार ने एक ऐसा गीत जो वो कभी भी मंच से नहीं सुनाते थे वो शुरू किया (रूपा रानी बड़े सयानी, मधुरिम वचना भोली- भाली ) तो सुनाते सुनाते कुमार अटक गए, एक दो बार कोशिश की लेकिन फिर उनकी नज़र मेरे ऊपर पडी और मंच से ही बोले शर्मा जी बताना भाई आगे क्या है. मै खडा हुआ और आगे की  पंक्तिया शुरू कर दी. इस तरह वो गीत पूरा हुआ. एक दम से मंच और सभी बचे हुए श्रोताओं में हंगामा हो गया. कवि सम्मेलनों के इतिहास में ये पहला मौक़ा होगा जब एक जाना माना कवि सामने बैठे श्रोता से कहे की आगे क्या है बताना. संचालक ने कहा शर्मा जी आप मंच पर आये और जो कुछ सुनना चाहे सबको सुनाये. लेकिन मैंने मना कर दिया. मैंने कहा श्रोता के रूप मे में नंबर १ हूँ कवि के रूप में आख़िरी पायदान पर नहीं बैठूंगा. जिस दिन मेरी कविता में दम होगा मै खुद मंच पे आ जाउंगा. उन्होंने कहा आप इतना तो करो ही  कि  अपने विजिटिंग कार्ड सारे कवियों को दे दो क्या पता कब किसे जरूरत पड़ जाये. वाद में प्रसिद्द कवयित्री श्रीमती सरिता शर्मा जी ने कहा शर्मा जी आप जैसा एक भी श्रोता मिल जाए तो हम लोगो का जीवन सफल हो जाए.

    इसके बाद अनेक जगह अनेक अवसरों पर डा कुमार को सुनते और मिलते रहे कभी अलीगढ़ कभी गाज़ियाबाद कभी एटा इस बीच मेरा निवास आगरा बना. तभी देखा कि डा कुमार इन्टरनेट पर लोकप्रिय हो गए है उन्हें ऑरकुट पर जोड़ा और जी टॉक और याहू पर भी और बात होने लगी. तभी हमारी आपसी बात चीत को पढके आगरा में उनके एक भगत  ने हमें ढूढ़ लिया तो हमने डा कुमार को फ़ोन मिला के  उनका परिचय भी कराया और कहा कि भाई इन बच्चो पर क्या जादू कर दिया है. तब तक (२००७ ) उनकी नयी किताब "कोई  दीवाना कहता है" भी प्रकाशित हो गई  थी उसमे कुछ नए मुक्तक और गीत भी पढ़ने को मिले. फिर हमारा ट्रांसफर जोधपुर हो गया तो २० नबम्बर २००८ को कुमार जोधपुर आये उन्हें किसी कार्यक्रम में आगे जाना था तो दिन भर उनसे मुलाक़ात हुई वो घर भी आये. तब घर वालो से उनका परिचय भी हुआ. मैं नोयडा के एक कार्यक्रम में उनके परिवार से मिल चुका था.

    मेरे बच्चो के स्कूल में बच्चे डा कुमार की चर्चा करते है तो बेटा और बेटी कहते है वो तो मेरे पापा के दोस्त है तो लडके लडकिया इसे गप्प समझते है. वैसे मेरे बेटे ने ३ साल की उम्र में सबसे पहले जो कविता टाइप चीज याद की वो कुमार का ये मुक्तक था जिसे उन दिनों मे गुनगुनाता रहता था.

    बहुत टूटा बहुत  बिखरा थपेड़े सह नहीं पाया, 
    हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया. 
    अधूरा अनसुना ही रह गया यूं प्यार का किस्सा, 
    कभी तुम सुन नहीं पाए कभी मैं कह नहीं पाया. 

    डा. कुमार के  कुछ लोकप्रिय मुक्तक यहाँ लिखने से खुद को नहीं रोक पा रहा हू.

     बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन
    मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तन चंदन
    इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है
    एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन
    *****************************
    समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नही सकता


    ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नही सकता
    मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
    जो मेरा हो नही पाया वो तेरा हो नही सकता
    ******************************
    मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है
    कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है 
    यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं
    जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है
    *********************************
    भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा
    हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
    अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
    मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा

     डा कुमार विश्वास को जन्म दिन की शुभकामनाये