Showing posts with label sukh dukh hari sharma. Show all posts
Showing posts with label sukh dukh hari sharma. Show all posts

Saturday, August 22, 2015

सुख और दुःख



दुःख सुख क्या है
वक्त का अँधेरा है
फैला है चारो ओर
कव होगा सवेरा
कब मिटेंगे दुःख मेरे
जीवन फिर महकेगा

दुःख के अंधेरो मे
आशा के होने से
विजली तो चमकती है
ऐसा समय आयेगा
फिर सुख के दिन होंगे
सूरज फिर चमकेगा

जीवन मे देखो तो
हैं रात बड़ी लम्बी
घनघोर है अँधेरा
दुःख का है कथानक
सुख महज प्रसंग है
कौन सदा चहकेगा