
गलती हो गई मुझसे ना हिसाब मांगो तुम,
देर हुई अब मैं हिसाब ना दे पाउँगा.
मैं सारा हिसाब रख लेता और जाँच लेती तुम,
अगर जानता अब तक मेरी राह ताकती होगी.
धुएँ का, धूल का, चोटों का, रुसवाई का,
दर्दो का, छालो का, ख्बाबों और खयालो का.
अंधियारों का, अन्देशो का, गुनाहों का, मलालो का,
उदासी का, तकलीफ का, बदहाली और बेबसी का.
लेकिन तुम बतलाओ, ये सब तुमको अगर पता होता,
तब भी क्या ऐसे ही मेरा पथ निहारती तुम.
इसके अलावा याद रखने लायक कुछ भी नहीं,
ऐसे असहाय, असमर्थ और असफल का हाथ थामती तुम.