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Thursday, February 10, 2011

जब याद आती हो तुम




जब भी मैं ले के बैठता हूं किताबें
तो याद आती हो मुझे तुम,
हर बार किताब रह जाती है
खुली की खुली बिना पढ़ी
मेरे मन के किसी कोने से
फिर यही आवाज आती है
इन किताबों में क्या रक्खा है.


पढना है तो कोई और किताब पढ़ो
किसी के दिल की किताब पढ़ो
किसी के मन की किताब पढ़ो
किसी की सांसों को पढ़ो
और कुछ भी ना पढ़ सको
तो ये कविता ही पढ़ लो
जो लिखी है बस तुम्हारे लिये.


इसे लिखा है आज अभी ही
तुमसे बातें करते हुए
कैसी रही नई कविता ?
वो ये सब पढ़ती है और
हमको जवाब देती है
कविता तो हमने ली सुन
इसमें से आती प्यार की धुन.

कुछ ऐसा भी दिखाओ गुण
तुम वहां कीबोर्ड पर लिखो
मैं यहां पर गाऊं रून-झुन
जवाब जमता है तो ठीक
नहीं तो अपना सिर धुन
मैंने तुझे चुना तू मुझे चुन
हवाए गाने लगी मीठी
धुन.