Sunday, February 14, 2010

जोधपुर मे हुआ ब्लोगर मिलन - पहली किश्त - १४.०२.१०

एक तरफ़ जहा ब्लोग जगत मे दिन भर वेलेन्टाइन डे पर तरह तरह की पोस्ट आ रही है वही जोधपुर मे कोटा से पधारे मशहूर ब्लोगर श्री दिनेश राय द्विवेदी जी (वकील साहब)  से मिलने के लिये एक छोटा सा ब्लोगर मिलन बिल्कुल अनौपचारिक रूप से हुआ. 

इस ब्लोगर मिलन की प्रस्तावना लिखी गयी वकील साहब के पिछले दौरे से जब मैने पहल की और वकील साहन मेरे से मेरे कार्यालय मे मिलने आये. उस समय भी मिलना तो तय हो गया लेकिन एक दिन पहले ही मेरी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी और थोडी सी मुझे भी चोट आयी लेकिन जब वकील साहव का फोन आया तो वो अपना काम निबटाकर मेरे कार्यालय पधारे और करीब १ घन्टा हम लोग साथ रहे और ब्लोग जगत मे हो रही हलचल पर चर्चा हुई. तभी हमने ये तय किया कि अगली बार जब वकील साहब जोधपुर आये तो कुछ और साथियो के साथ मिला जाये. 

इसी कडी मे मैने ये सूचना जारी कर दी कि १४ फ़रबरी २०१० को जोधपुर मे ब्लोगर मिलन होगा. मुझे बहुत कम ब्लोगर साथियो की जानकारी थी. मेरे अलावा सीप का सपना ब्लोग बाले श्री राकेश मूथा जी और है इसके अलावा बहुत मेहनत करने के बाद मुझे कुमारी शोभना चौधरी और उनके द्वारा श्री सन्जय व्यास जी का पता लगा. इन्ह्ए मैने सन्देश दिये और सौभाग्य से १-२ दिन मे ही इनसे सम्पर्क हो गया. और शनिवार को अनायास कुश से बात हुई तो ये पता चला कि जैसे मेरा घर जयपुर मे है और जोधपुर रह रहा हू वैसे ही वो जयपुर रह रहे है और घर जोधपुर  मे है. बात चली तो पता चला कि वो भी जोधपुर आ रहे है तो फिर दिन मे कार्यक्रम तय हुआ और १४.०२.२०१० रविवार को पाल रोड स्थित अशोक गार्डन मे दोपहर पश्चात मिलने का निश्चय किया.
अभी विवरण जारी है,,,,,,,,,,,,,,,,,,    

   
 

 चित्र मे सभी ६ ब्लोगर है और नाम उनके नाम -.हरि शर्मा, कुश, दिनेश राय द्विवेदी, राकेश मूथा, शोभना और सन्जय व्यासनीचे का चित्र कुमारी शोभना द्वारा लिया गया 

Thursday, February 11, 2010

फिलाडेल्फिया (अमेरिकी राज्य पेंसिल्वेनिया ) मे वर्फ़ का नज़ारा




श्री सन्जीव सोफ़्टवेयर  इन्जीनियर  -  फिलाडेल्फिया (अमेरिकी राज्य  पेंसिल्वेनिया )
फिलाडेल्फिया नाम का शहर है 
वहा रहते है बहुत पुराने दोस्त 
कहने को अभासी पर लौकिक ही है 
कई साल से बसे हुए है वहा 
सन्जीव अपने परिवार के साथ 
आज जब उनसे हुई बात 
पूछा हमने कैसे है हालचाल 
हटा रहा हू वर्फ़ के पहाड 
जमी है २ -२ फ़ीट वर्ग 
गाल बेहाल है यहा हमारा 
आप पूछते हो क्या हाल है   

वर्फ़  की जब बात सुनी तो 
जिग्यासा मन मे उठी 
 कैसी दिखती होही  वर्फ़
कैसा वातावरन होगा
क्या मनोरम छटा होगी 
तनिक हमको दिखा तो दो  


कहने लगे शर्मा जी 
जिधर भी नजर डालो 
वर्फ़ की ही माया है 
वर्फ़ का ही साया है 
वर्फ़ मे कोई सडक पे 
निकल नही पाया है 
हमने तब उनसे पूछा
क्या वहा हमेशा ही 
ऐसा  ही मौसम है 
ऐसे ही वर्फ़ का 
चारो दिशाओ मे 
खुला खेल होता है  


इस पर वो कहते है 
आखिरी के महीनो मे 
हर साल  ऐसे ही 
देखने मे आया है 
यहा का मौसम तो 
वर्फ़ीला ही होता है 

लेकिन इस बार तो 
६० साल के बाद 
इतनी वर्फ़ पडी है 
सूरज के दर्शन नही 
मौसम तो अच्छा है 
पर परेशानी बडी 
(चित्र गूगल से साभार  ) 

Tuesday, February 9, 2010

आज कुमार विश्वास जयन्ती है - जन्म १०.०२.१९७०

वास

डाँ कुमार विश्वास
जन्मदिन  - बसंत पंचमी

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है 
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है

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१० फरवरी (बसंत-पंचमी ) को पिलखुवा (गाज़ियाबाद) में जन्में डाँ कुमार विश्वास का नाम हिन्दी कविता-प्रेमियों के लिए परिचय का मोहताज नहीं है। कवि-सम्मेलन के मंचों पर उनकी लोकप्रियता का कारण उनकी वाक्-पटुता, विद्वता, और समय-अवसर पर अपनी विराट स्मरण-शक्ति का प्रयोग है। श्रोताओं को अपने जादुई सम्मोहन में लेने का उनका अदभुत कौशल, उन्हें समकालीन हिन्दी कवि-सम्मेलनों का सबसे दुलारा कवि बनाता है। आई.आई.टी , आई.आई.एम या कॉरपरेट-जगत के अधिक सचेत श्रोता हों, या कोटा-मेले के बेतरतीब फैले दो लाख के जन समूह का विस्तार हो , प्रत्येक मंच को अपने संचालन में डॉ कुमार विश्वास इस तरह लयबद्ध कर देते हैं कि पूरा समारोह अपनी संपूर्णता को जीने लगता है। स्व० धर्मवीर भारती ने उन्हें हिन्दी की युवतम पीढ़ी का सर्वाधिक संभावनाशील गीतकार कहा था। महाकवि नीरज जी उनके संचालन को निशा नियामक कहते हैं। तो प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा के अनुसार वे इस पीढ़ी के एकमात्र ISO 2006 कवि हैं। हास्यरसावतार लालू यादव, अभिनेता राजबब्बर, गोविन्दा, खिलाड़ी राहुल द्रविड़, मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, नीतिश कुमार, टेली न्यूज के  चेहरो, उद्योगपतियों से लेकर भोपाल स्टेशन के कुलियों और मंदसौर मध्यप्रदेश की अनाज मंडी के पल्लेदारों तक फैला उनका प्रशंसक परिवार ही डॉ कुमार विश्वास की सचेत प्रज्ञा का परिचायक है। यह समूह डॉ कुमार विश्वास के देश दुनियां में फैले उन लाखों दीवानों का है जिन्हें उन्होंने बार-बार अपनी क्षमताओं से सम्मोहित किया है और जिनके दिलों की दास्तां को अपनी मीठी-आवाज , खास-अदायगी और खूबसूरत-लफ़्जों में बयान किया है
http://www.kumarvishwas.com/  से साभार 
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आज १० फरबरी है और इसे मैं कुमार विश्वास जयन्ती के रूप में याद करता हूँ. डा. कुमार विश्वास जिन्हें मैं इसलिए बहुत पसंद करता हू कि उन्होंने हिन्दी कवि सम्मलेन के मंचो से विदा होते हुए गीतों को नया जीवन दिया. एक समय आ गया था कि गीतकारो को कोई सुनना ही नहीं चाहता था और बड़े नामी गीतकारो को भी केवल नाम के लिए ही बुलाया जाता था. उस समय डा कुमार एक नयी हवा के झोंके की तरह आये तो आते ही छा गए.

१९९६ में कुमार का पहला कविता संग्रह प्रकाशित हुआ जिसके एक हस्ताक्षरित प्रति मेरे पास अभी भी है. उससे कुछ माह पहले ही उनसे ठीक से परिचय हुआ था. मेरी कुछ खराब आदतों में से ये भी है कि मैं पंक्ति, मुक्तक या गीत नहीं याद करता बल्कि किताब याद कर  लेता हू और १ महीने में ही मुझे डा. कुमार पूरी तरह से याद हो गए. कवि सम्मेलनों में कुमार से मुलाक़ात होती रहती.

२००० की गीत चांदनी में कुमार जयपुर  आये तो गीत को समर्पित इस अनोखे आयोजन में आगे से पीछे तक कुमार की धूम मची  हुई थी. पहले दौर में ही कुमार ने सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया. दूसरे दौर में जब कुमार से एक के बाद दूसरे गीत की मांग होने लगी तो कुमार ने एक ऐसा गीत जो वो कभी भी मंच से नहीं सुनाते थे वो शुरू किया (रूपा रानी बड़े सयानी, मधुरिम वचना भोली- भाली ) तो सुनाते सुनाते कुमार अटक गए, एक दो बार कोशिश की लेकिन फिर उनकी नज़र मेरे ऊपर पडी और मंच से ही बोले शर्मा जी बताना भाई आगे क्या है. मै खडा हुआ और आगे की  पंक्तिया शुरू कर दी. इस तरह वो गीत पूरा हुआ. एक दम से मंच और सभी बचे हुए श्रोताओं में हंगामा हो गया. कवि सम्मेलनों के इतिहास में ये पहला मौक़ा होगा जब एक जाना माना कवि सामने बैठे श्रोता से कहे की आगे क्या है बताना. संचालक ने कहा शर्मा जी आप मंच पर आये और जो कुछ सुनना चाहे सबको सुनाये. लेकिन मैंने मना कर दिया. मैंने कहा श्रोता के रूप मे में नंबर १ हूँ कवि के रूप में आख़िरी पायदान पर नहीं बैठूंगा. जिस दिन मेरी कविता में दम होगा मै खुद मंच पे आ जाउंगा. उन्होंने कहा आप इतना तो करो ही  कि  अपने विजिटिंग कार्ड सारे कवियों को दे दो क्या पता कब किसे जरूरत पड़ जाये. वाद में प्रसिद्द कवयित्री श्रीमती सरिता शर्मा जी ने कहा शर्मा जी आप जैसा एक भी श्रोता मिल जाए तो हम लोगो का जीवन सफल हो जाए.

इसके बाद अनेक जगह अनेक अवसरों पर डा कुमार को सुनते और मिलते रहे कभी अलीगढ़ कभी गाज़ियाबाद कभी एटा इस बीच मेरा निवास आगरा बना. तभी देखा कि डा कुमार इन्टरनेट पर लोकप्रिय हो गए है उन्हें ऑरकुट पर जोड़ा और जी टॉक और याहू पर भी और बात होने लगी. तभी हमारी आपसी बात चीत को पढके आगरा में उनके एक भगत  ने हमें ढूढ़ लिया तो हमने डा कुमार को फ़ोन मिला के  उनका परिचय भी कराया और कहा कि भाई इन बच्चो पर क्या जादू कर दिया है. तब तक (२००७ ) उनकी नयी किताब "कोई  दीवाना कहता है" भी प्रकाशित हो गई  थी उसमे कुछ नए मुक्तक और गीत भी पढ़ने को मिले. फिर हमारा ट्रांसफर जोधपुर हो गया तो २० नबम्बर २००८ को कुमार जोधपुर आये उन्हें किसी कार्यक्रम में आगे जाना था तो दिन भर उनसे मुलाक़ात हुई वो घर भी आये. तब घर वालो से उनका परिचय भी हुआ. मैं नोयडा के एक कार्यक्रम में उनके परिवार से मिल चुका था.

मेरे बच्चो के स्कूल में बच्चे डा कुमार की चर्चा करते है तो बेटा और बेटी कहते है वो तो मेरे पापा के दोस्त है तो लडके लडकिया इसे गप्प समझते है. वैसे मेरे बेटे ने ३ साल की उम्र में सबसे पहले जो कविता टाइप चीज याद की वो कुमार का ये मुक्तक था जिसे उन दिनों मे गुनगुनाता रहता था.

बहुत टूटा बहुत  बिखरा थपेड़े सह नहीं पाया, 
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया. 
अधूरा अनसुना ही रह गया यूं प्यार का किस्सा, 
कभी तुम सुन नहीं पाए कभी मैं कह नहीं पाया. 

डा. कुमार के  कुछ लोकप्रिय मुक्तक यहाँ लिखने से खुद को नहीं रोक पा रहा हू.

 बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तन चंदन
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन
*****************************
समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नही सकता


ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नही सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नही पाया वो तेरा हो नही सकता
******************************
मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है 
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है
*********************************
भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा

 डा कुमार विश्वास को जन्म दिन की शुभकामनाये

Sunday, February 7, 2010

टिप्पणी बन गयी पोस्ट



एक ब्लोग कहानी में एक टिप्पी होती है , एक टिप्पा होता है

मेरे ब्लोग पर टिप्पणी देने बाले
बेनामी  ना देना नाम से देने बाले 

तुम यहा टिपियाओ या ना टिपियाओ ये हक है तुमको
मेरी बात  और है  मुझे तो टिपियाना है

भूले से टिप्प्णी कर बैठा 
नादान है बेचारा ब्लोगर ही तो है 
हर ब्लोगर से टिप्पणी हो जाती है 
भेजो ना लीगल नोटिस टिप्पणी ही तो है 

तेरी प्यारी प्यारी टिपणी पे 
किसी की नज़र ना लगे
टिपियाबद्दूर 

बसन्ती, गब्बर की पोस्ट पे टिप्पणी मत करना

  
ये तो हुई टिप्पणी के साथ मसखरी. अब बात अजय की बात की तो भैया हमारी टिप्प्णी उतनी ही गम्भीर होती है जितना गम्भीर होने का हम नाटक कर रहे होते है. और हरि भाई उर्फ़ सन्जीव  भैया को तो पैसे मिलते थे  गम्भीरता ओढने के हम तो मुफ़त मे अपनी शकल बिगाडे घूम रहे है. 

हमने टिप्पणी मे कहा कि लडकी अगर बेरुखी दिखाये तो ये नही समझना चाहिये कि उसे आप पसन्द नही है. हम अपनी इस बात पे कायम है. अगर आपकी प्रीति सच्ची है और बेरुखी दिखती है तो प्रेमी को उसके अनुकूल होने के लिये और प्रयास करने चाहिये.

शिशु पाल सिह निर्धन ने कहा  -  

जब तक प्रतिबिम्ब लगे मैला
दर्पन को रख अपने आगे
पूजा का दीपक बनकर जल
जब तक ना मौन प्रतिमा त्यागे

इसी बात को कुवर बेचैन कहते है  - 

दीवारो पे दस्तक देते रहना है
दीवारो मे दरवाजे बन जायेन्गे

बात ग्लोबल वार्मिन्ग की उसके लिये तो दुनिया भर के लोग चिन्तित है. लेकिन हम ग्लोबल ब्लोगिन्ग के लिये निकले थे लेकिन ब्लोग  जगत मे ब्लोगर वार्मिन्ग तक पहुच गये है. कुछ इसकी भी तो चिन्ता करो मेरे भाई.
हरि शर्मा
9680890951

मेरा दूसरा ब्लोग
http://sharatkenaareecharitra.blogspot.com/

Sunday, January 31, 2010

चले जाना वेहद प्रतिभाशाली और सभ्य राजनेता का - राम निवास मिर्धा

२९ जनवरी २०१० को राजस्थान ने एक वेहद सभ्य और बहुमुखी प्रतिभाशाली राजनेता राम निवास मिर्धा को  खो दिया. ८६ बर्ष की आयु में दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. अभी वे संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष थे. उनका जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले के जसोल कस्वे में   २४ अगस्त १९२४ को  हुआ और इनका परिवार नागौर जिले के कुचेरा के पास राड कस्वे से सम्बंधित है.  उनके पिता स्वर्गीय बलदेव राज मिर्धा तत्कालीन जोधपुर राज्य की पुलिस सेवा में अधिकारी थे.  


उन्होंने एम ए, एल एल बी की शिक्षा भारत  के इलाहाबाद विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय से और जेनेवा के ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़  इंटरनॅशनल स्टडीज से प्राप्त की. शिक्षा समाप्ति के बाद कुछ समय तक आपने राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप  में सेवा की और फिर राजनीति  में कूद पड़े. १९५३ में राजस्थान विधान सभा में प्रवेश किया. १९५४ से १९५७  तक आप राजस्थान सरकार में मंत्री रहे  और १९५७ में उन्हें उनकी योग्यता और प्रतिभा को देखते हुए राजस्थान विधान सभा का अध्यक्ष चुना गया,  इस पद पर आपने १९६७ तक काम किया. १९६७ से १९84 तक श्री मिर्धा  राज्य सभा के सदस्य रहे. और १९८४ से १९८९ तक नागौर से और १९९१ से १९९६ तक बाड़मेर से लोकसभा के सदस्य रहे. 


केंद्र की राजनीति में उन्होंने बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारिया बड़ी कुशलता से निभाई. जिनका विवरण इस प्रकार है -


केन्द्रीय राज्य मंत्री - गृह मंत्रालय, कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग (जून 1970-1,974 अक्टूबर) 
केन्द्रीय राज्य मंत्री - रक्षा उत्पादन (अक्टूबर 1974-1975 दिसम्बर, केन्द्रीय राज्य मंत्री - आपूर्ति एवं पुनर्वास (स्वतंत्र प्रभार) (दिसंबर 1975-1977 मार्च)
उपाध्यक्ष, राज्य सभा (1977-1980)
जल संसाधन विभाग के मंत्री (1983 जनवरी 1984 अगस्त)
विदेश (August 1,984-1984 दिसम्बर) मामलों के मंत्री
संचार (1985-1986 अक्टूबर) जनवरी के मंत्री
कपड़ा मंत्री (कैबिनेट रैंक), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण का अतिरिक्त प्रभार (अक्टूबर 1986-1989 दिसम्बर),
सदस्य दसवें बाड़मेर से लोक सभा, (1991-1996) राजस्थान, संयुक्त संसदीय समिति  1992  के अध्यक्ष प्रतिभूति और बैंकिंग में अनियमितताओं की जांच के लिए. . 


राम निवास मिर्धा ने अनेक मौको पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में जिताभारत का प्रतिनिधित्व: किया.जैसे -
संयुक्त राष्ट्र संघ , राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलनराष्ट्रमंडल पीठासीन अधिकारियों का सम्मलेनअंतर संसदीय संघ का  सम्मेलनभारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता संयुक्त राष्ट्र, महासभा, 1984 से सितम्बरसदस्य कार्यकारी 1993-1997 (यूनेस्को के बोर्ड).
वह बहुत से सांस्कृतिक  मामलों में सक्रिय रहे हैं. राष्ट्रीय खेल संस्थान, दिल्ली शहरी कला आयोग के उपाध्यक्ष विशेष आयोजन ग्यारहवीं एशियाई खेलों के लिए समिति, और राष्ट्रपति, यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया.
राष्ट्रपति, भारतीय विरासत सोसाइटी
वरिष्ठ उपाध्यक्ष, संवैधानिक और संसदीय अध्ययन संस्थान. 
मानद. राष्ट्रपति विश्व यू एन संघों पर संघ
अध्यक्ष, भारतीय यू एन एसोसिएशन के संघ
अध्यक्ष भारतीय इंटरनेशनल लॉ सोसायटी
अध्यक्ष, संगीत नाटक अकादमी (राष्ट्रीय संगीत, नृत्य तथा नाटक अकादमी)
अध्यक्ष,  सूरजमल  मेमोरियल एजुकेशन सोसायटी, नई दिल्ली.

इस पोस्ट के माध्यम से हम उन्हे अपनी भावभीनी श्रद्धान्जली अर्पित करते है